पाकिस्तानी लोगों के भगत सिंह पर विचार : वीडियो

जन्म

शताब्दी  वर्ष

( 27 सितम्बर

2007–27 सितम्बर

2008 ) इन्कलाब जिंदाबाद !

“यह युद्ध तब तक चलता रहेगा जब तक कि शक्तिशाली व्यक्ति भातीय जनता और श्रमिकों की आय के साधनों पर अपना अधिकार जमाये रखेंगे| चाहे ऐसे व्यक्ति अंग्रेज पूंजीपति , अंग्रेज शासक या सर्वथा भारतीय  ही हों| यदि कुछ भारतीय पूंजीपतियों  द्वारा  ही निर्धनों का खून चूसा जा रहा हो तब भी इस स्थिथि में कोई अन्तर  नहीं पड़ता|”– फाँसी से तीन दिन पूर्व भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव द्वारा फाँसी के बजाय गोली से उड़ाए जाने की मांग करते हुए पंजाब के गवर्नर को लिखे गए पत्र से

“धार्मिक अन्धविश्वास और कट्टरपन हमारी प्रगति में बहुत बड़े बाधक हें | वे हमारे रास्ते में रोड़ा साबित  हुए हैं  और हमें उनसे हर हालत में पीछा छुडा लेना चाहिए| जो चीज़ आज़ाद विचारों को बर्दाश्त नहीं कर सकती उसे समाप्त हो जाना चाहिए| –भगत सिंह, भगवती चरण वोहरा, ‘नौजवान भारत सभा का घोषणा पत्र ‘ से

” लोगों को परस्पर लड़ने से रोकने  के लिए वर्ग चेतना की जरूरत है | गरीब मेहनतकश व किसानों को  स्पष्ट समझा देना चाहिए कि तुम्हारे असली  दुश्मन पूंजीपति हें, इसलिए तुम्हें इनके हथकंडो से बचकर रहना चाहिए और इनके हत्थे चढ़ कुछ न करना चाहिए |”–भगत सिंह ‘साम्प्रदायिक दंगे और उनका इलाज’ से

“नौजवानों को क्रांति का यह संदेश देश के कोने-कोने में पहुंचाना है, फैक्ट्री-कारखानों के क्षेत्रों में, रहने वाले करोडो लोगों  में इस क्रांति की अलख जगानी है जिससे आज़ादी आयेगी और तब एक मनुष्य द्वारा दूसरे मनुष्य का शोषण असंभव हो जाएगा  |”–भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त पंजाब पंजाब छात्र संघ लाहौर के दूसरे अधिवेशन में जेल से भेजे गए पत्र से |

“इन्कलाब की तलवार विचारों की सान पर तेज़ होतो है !”